Startup India Gets a Major Boost: Government Revamps Startup Recognition Framework
Startup India Gets a Major Boost: Government Revamps Startup Recognition Framework
भारत सरकार ने स्टार्टअप इंडिया पहल को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से स्टार्टअप मान्यता ढांचे (Startup Recognition Framework) में व्यापक संशोधन किए हैं। ये बदलाव ऐसे समय पर किए गए हैं जब भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अपने दूसरे दशक में प्रवेश कर चुका है और वैश्विक नवाचार मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है।
फरवरी 2026 में घोषित यह संशोधित ढांचा सरकार की उस दीर्घकालिक सोच को दर्शाता है, जिसके तहत भारत को वैश्विक नवाचार शक्ति (Global Innovation Hub) के रूप में स्थापित करना और उभरती प्रौद्योगिकियों में उद्यमिता को संस्थागत समर्थन देना प्रमुख लक्ष्य है।
इन संशोधनों के अंतर्गत टर्नओवर सीमा में वृद्धि, डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए अलग श्रेणी, और सहकारी समितियों को स्टार्टअप मान्यता के दायरे में शामिल किया गया है। यह पहल न केवल शहरी तकनीकी स्टार्टअप्स को बल्कि ग्रामीण, कृषि और सामुदायिक नवाचार को भी मजबूती प्रदान करती है।
स्टार्टअप इंडिया मान्यता ढांचे में संशोधन क्यों हैं महत्वपूर्ण?
पिछले एक दशक में भारत में स्टार्टअप्स की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। हालांकि, कई नवाचार आधारित कंपनियां कारोबार सीमा पार करने के कारण समय से पहले स्टार्टअप दर्जे से बाहर हो जाती थीं, जिससे वे कर छूट और सरकारी लाभों से वंचित हो जाती थीं।
नया ढांचा इस समस्या का समाधान करते हुए यह सुनिश्चित करता है कि:
- स्टार्टअप्स को लंबे समय तक नीतिगत समर्थन मिले
- अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश को प्रोत्साहन मिले
- रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को गति मिले
टर्नओवर सीमा बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये: स्टार्टअप्स को मिलेगा विकास का नया अवसर
संशोधित नियमों के तहत सामान्य स्टार्टअप्स के लिए वार्षिक टर्नओवर सीमा को 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह बदलाव इस वास्तविकता को स्वीकार करता है कि नवाचार आधारित उद्यम अक्सर शुरुआती वर्षों में मुनाफा कमाने के बजाय अपने संसाधनों को अनुसंधान और उत्पाद विकास में पुनर्निवेश करते हैं।
इस बदलाव के प्रमुख लाभ:
- स्टार्टअप्स को DPIIT मान्यता अधिक समय तक बनी रहेगी
- धारा 80-IAC के तहत आयकर छूट जारी रहेगी
- एंजेल टैक्स से राहत मिलेगी
- सरकारी योजनाओं और खरीद प्रक्रियाओं में निरंतर भागीदारी संभव होगी
यह संशोधन स्टार्टअप्स को प्रोटोटाइप चरण से लेकर व्यावसायीकरण और IPO तक समर्थन प्रदान करता है।
डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए नई श्रेणी: भारत के तकनीकी भविष्य की नींव
सरकार द्वारा शुरू की गई डीप टेक स्टार्टअप श्रेणी भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। इस श्रेणी के अंतर्गत स्टार्टअप्स की अधिकतम आयु सीमा 10 वर्ष से बढ़ाकर 20 वर्ष कर दी गई है।
डीप टेक स्टार्टअप्स में शामिल क्षेत्र:
- सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण
- क्वांटम कंप्यूटिंग
- अंतरिक्ष एवं रक्षा प्रौद्योगिकी
- उन्नत सामग्री और बायोटेक्नोलॉजी
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स
इन स्टार्टअप्स के लिए अधिकतम टर्नओवर सीमा ₹300 करोड़ तय की गई है, जिससे अनुसंधान आधारित व्यवसायों को स्थिरता मिल सके।
सरकार ने यहां Technology Readiness Level (TRL) को मुख्य मूल्यांकन मानदंड बनाया है, जिससे आयु के बजाय तकनीकी परिपक्वता और नवाचार की गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जाती है।
सहकारी समितियों को स्टार्टअप मान्यता: समावेशी नवाचार की दिशा में बड़ा कदम
संशोधित ढांचे का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू है सहकारी समितियों को स्टार्टअप मान्यता के दायरे में शामिल करना। अब:
- बहु-राज्य सहकारी समितियां अधिनियम, 2002
- राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारी कानूनों
के तहत पंजीकृत सहकारी संस्थाएं स्टार्टअप इंडिया मान्यता के लिए आवेदन कर सकती हैं।
इससे होने वाले लाभ:
- कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा
- महिला स्वयं सहायता समूहों को औपचारिक वित्त तक पहुंच
- सामुदायिक आधारित उद्यमों में डिजिटल समाधान
- टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्टार्टअप संस्कृति का विस्तार
यह कदम नवाचार के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
स्टार्टअप मान्यता के प्रमुख वित्तीय और नीतिगत लाभ
संशोधित स्टार्टअप इंडिया फ्रेमवर्क के तहत मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं:
🔹 कर संबंधी लाभ
- धारा 80-IAC के तहत 10 वर्षों में से 3 वर्षों तक 100% कर छूट
- डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए यह अवधि 20 वर्ष तक
🔹 एंजेल टैक्स से छूट
- उचित बाजार मूल्य से अधिक निवेश पर कर से राहत
- पूंजी का उपयोग उत्पादक और नवाचार आधारित गतिविधियों में आवश्यक
🔹 सरकारी खरीद तक आसान पहुंच
- GeM पोर्टल पर बिना पूर्व अनुभव के निविदा
- बयाना राशि में छूट
- ट्रायल ऑर्डर और पायलट प्रोजेक्ट के अवसर
स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने वाली अन्य सरकारी पहलें
2016 में शुरू हुई स्टार्टअप इंडिया पहल ने भारत में उद्यमिता के स्वरूप को बदल दिया है। इसके तहत:
- स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम
- फंड ऑफ फंड्स
- स्टार्टअप इंडिया हब
- राष्ट्रीय स्टार्टअप रैंकिंग
जैसी योजनाओं ने हजारों स्टार्टअप्स को प्रारंभिक समर्थन दिया है।
इसके अलावा:
- अटल इनोवेशन मिशन और अटल टिंकरिंग लैब्स
- डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया
- PLI योजनाएं
भारत को तकनीक और विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रही हैं।
जनवरी 2026 में DSIR द्वारा पात्रता शर्तों में ढील और केंद्रीय बजट 2026-27 में ₹1 लाख करोड़ के R&D और इनोवेशन फंड ने इस इकोसिस्टम को और गति दी है।
निष्कर्ष
स्टार्टअप इंडिया के दूसरे दशक में प्रवेश के साथ, संशोधित स्टार्टअप मान्यता ढांचा भारत को अनुसंधान, नवाचार और समावेशी विकास के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
यह ढांचा न केवल बड़े तकनीकी स्टार्टअप्स बल्कि ग्रामीण, कृषि और सामुदायिक नवप्रवर्तकों को भी समान अवसर प्रदान करता है, जिससे भारत की नवाचार अर्थव्यवस्था भविष्य-सुरक्षित, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बन सके।