Why did Genghis Khan reach India but then turn back? The real reason according to history:
चंगेज़ ख़ाँ भारत तक पहुंचकर वापस क्यों गया? इतिहास की सच्ची वजह
genghis khan religion-अक्सर लोग उसके नाम में लगे “ख़ाँ” शब्द के कारण उसे मुस्लिम समझ लेते हैं, जबकि ख़ाँ एक उपाधि थी। चंगेज़ मंगोल था और शामानी धर्म को मानता था, जिसमें आकाश की पूजा की परंपरा रही है।
From poverty, humiliation, and struggle to world conquest:
गरीबी, अपमान और संघर्ष से विश्व विजय तक
करीब 50 वर्ष की उम्र में जाकर उसने विजय अभियान शुरू किया, लेकिन इसके बाद जो सिलसिला चला, उसने उसे इतिहास के सबसे महान योद्धाओं की सूची में ला खड़ा किया।
उसकी सेनाएँ ऑस्ट्रिया, हंगरी, पोलैंड, वियतनाम, बर्मा, जापान और इंडोनेशिया तक जा पहुँचीं।

The murder of his stepbrother and his cruel nature: सौतेले भाई की हत्या और निर्मम स्वभाव
13 वर्ष की उम्र में उसने अपने सौतेले भाई बेहतेर की हत्या कर दी।
Genghis Khan was wounded by a poisoned arrow: ज़हरीले तीर से घायल हुआ चंगेज़ ख़ाँ
हालाँकि, अपनी जान बचाने वाले व्यक्ति के प्रति भी चंगेज़ का स्वभाव कठोर ही रहा। उसने रूखे लहज़े में कहा—
Genghis Khan had many flaws: चंगेज़ ख़ाँ के कई अवगुण
Genghis Khan’s dangerous anger: चंगेज़ ख़ाँ का ख़तरनाक गुस्सा
1220 के दशक में जब उसने ट्रांजोक्सियाना पर कब्ज़ा कर लिया, तब पश्चिम एशिया के मुस्लिम शासकों से बातचीत के लिए उसने एक दुभाषिए और एक लिपिक को रखा।
“तुम ग़द्दार हो। यह पत्र पढ़कर मोसुल का राजकुमार और ज़्यादा घमंडी हो जाएगा।”
Cruelty and generosity go hand in hand: क्रूरता के साथ दरियादिली भी
Cruelty was justified:
क्रूरता को ठहराया तर्कसंगत
Genghis returned from the Indian border: भारत की सीमा से वापस लौटा चंगेज़
The Indian heat bothered Genghis:
भारत की गर्मी ने चंगेज़ को परेशान किया
Shortage of horses and their fodder:
घोड़ों और उनके चारे की कमी
Genghis’s last message: चंगेज़ का आख़िरी संदेश
FAQ : Genghis Khan : चंगेज खान मुख्य प्रश्न और उनके उत्तर
चंगेज खान कौन था
चंगेज़ ख़ान, जिनका असली नाम तेमुजिन था और जिनका जन्म लगभग 1162 में हुआ, एक प्रसिद्ध मंगोल योद्धा और शासक थे। उन्होंने अलग-अलग बिखरी हुई मंगोल जनजातियों को एकजुट किया और मंगोल साम्राज्य की नींव रखी, जो आगे चलकर दुनिया का सबसे बड़ा स्थलीय साम्राज्य बना। चंगेज़ ख़ान अपनी बहादुरी, सख़्त युद्ध नीति और बड़ी-बड़ी जीतों के लिए जाने जाते हैं। उनके नेतृत्व में मंगोल साम्राज्य एशिया से लेकर यूरोप तक फैल गया। इतिहास में उनका नाम आज भी इसलिए याद किया जाता है क्योंकि उन्होंने दुनिया को गहराई से प्रभावित किया और उनकी संतानें आज भी लाखों लोगों में पाई जाती हैं।
चंगेज खान की मौत कैसे हुई?
चंगेज़ ख़ान की मौत का असली कारण आज भी इतिहासकारों के बीच चर्चा का विषय है। ज़्यादातर इतिहासकार मानते हैं कि उनकी मृत्यु 1227 ई. में चीन में चल रहे एक सैन्य अभियान के दौरान हुई। माना जाता है कि या तो वे घोड़े से गिरने की वजह से गंभीर रूप से घायल हुए थे, या फिर किसी बीमारी के कारण उनकी मौत हुई। हालांकि उनकी मृत्यु को लेकर कई कहानियाँ मिलती हैं, लेकिन सभी पर एक जैसा भरोसा नहीं किया जाता।
चंगेज़ ख़ान की मौत से जुड़े मुख्य कारण और मत:
घोड़े से गिरने की घटना:
सबसे ज़्यादा मानी जाने वाली बात यह है कि शिकार के दौरान चंगेज़ ख़ान अपने घोड़े से गिर गए थे। इस हादसे में उन्हें अंदरूनी चोटें आईं, जो धीरे-धीरे गंभीर हो गईं और अंत में उनकी मृत्यु हो गई।
बीमारी:
कुछ इतिहासकारों का मानना है कि चंगेज़ ख़ान किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो गए थे। उस समय सैनिक शिविरों में प्लेग, टाइफाइड और मलेरिया जैसी बीमारियाँ आम थीं, और संभव है कि इन्हीं में से किसी बीमारी ने उनकी जान ले ली।
तीर लगने की कहानी:
प्रसिद्ध यात्री मार्को पोलो के अनुसार, एक युद्ध के दौरान चंगेज़ ख़ान के घुटने में तीर लगा था। बाद में उस घाव में संक्रमण फैल गया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। हालांकि इस मत को सभी इतिहासकार पूरी तरह स्वीकार नहीं करते।
चंगेज खान को कहाँ दफनाया गया है?
चंगेज़ ख़ान को कहाँ दफनाया गया था, यह बात आज तक एक बड़ा रहस्य बनी हुई है। माना जाता है कि 1227 ई. में उनकी मृत्यु के बाद उन्हें मंगोलिया में बुरखान खलदुन पर्वत के आसपास किसी गुप्त स्थान पर दफनाया गया था। ऐसा इसलिए किया गया ताकि उनकी कब्र कभी किसी को न मिल सके। चीन में बना “चंगेज़ ख़ान का मकबरा” असल में उनकी कब्र नहीं है, बल्कि केवल एक स्मारक है।
चंगेज़ ख़ान की कब्र से जुड़े मुख्य तथ्य:
कब्र का स्थान अज्ञात:
कहा जाता है कि अंतिम संस्कार के समय कब्र की जगह को पूरी तरह गोपनीय रखा गया। कुछ कथाओं के अनुसार, जिन लोगों ने दफन प्रक्रिया में हिस्सा लिया था, उन्हें भी मार दिया गया, ताकि कोई भी इस जगह के बारे में न जान सके।
संभावित दफन स्थान:
अधिकांश इतिहासकारों का मानना है कि चंगेज़ ख़ान को उनके जन्मस्थान के पास, मंगोलिया के खेंटी प्रांत में स्थित बुरखान खलदुन पर्वत के आसपास दफनाया गया था।
चीन में बना मकबरा:
चीन के इनर मंगोलिया क्षेत्र के ओरडोस शहर में स्थित चंगेज़ ख़ान का मकबरा एक धार्मिक और पर्यटन स्थल है। यहाँ चंगेज़ ख़ान की याद में पूजा होती है, लेकिन उनका शव वहाँ नहीं है।
आज भी बना हुआ रहस्य:
लगभग 800 साल से ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी, चंगेज़ ख़ान की असली कब्र कहाँ है, यह अभी तक किसी को पता नहीं चल सका है।
चंगेज खान को किसने हराया
चंगेज़ ख़ान को युद्ध में किसी एक व्यक्ति ने नहीं हराया था। उनकी मौत किसी लड़ाई में हार की वजह से नहीं हुई, बल्कि माना जाता है कि 1227 ई. में उनकी मृत्यु स्वाभाविक कारणों से हुई। इतिहासकारों के अनुसार, या तो वे घोड़े से गिरने के कारण गंभीर रूप से घायल हुए थे, या फिर मलेरिया जैसी किसी बीमारी से उनकी जान चली गई।
यह सही है कि चंगेज़ ख़ान के जीवनकाल में कुछ इलाकों में छोटे-मोटे विद्रोह हुए थे, लेकिन उन्हें कभी सीधे तौर पर युद्ध में हराया नहीं जा सका। उनकी मृत्यु के बाद, उनके वंशजों और उत्तराधिकारियों ने साम्राज्य संभाला। बाद के समय में भारत जैसे क्षेत्रों में मंगोलों को अलाउद्दीन खिलजी जैसे शासकों ने पराजित किया, लेकिन यह जीत चंगेज़ ख़ान के खिलाफ नहीं थी। इसलिए इतिहास में चंगेज़ ख़ान को एक ऐसे शासक के रूप में देखा जाता है, जिन्हें उनके जीवनकाल में कोई भी युद्ध में पराजित नहीं कर पाया।
चंगेज खान की कितनी पत्नियाँ थीं?
चंगेज़ ख़ान की कई पत्नियाँ और रखैलें थीं। ज़्यादातर महिलाएँ उन्हें युद्ध में जीते गए इलाकों से मिली थीं। कई बार ये महिलाएँ पूरे मंगोल साम्राज्य के अलग-अलग हिस्सों से लाई जाती थीं। जिन महिलाओं को उनकी पत्नी या रखैल बनाया जाता था, वे अक्सर राजघरानों से जुड़ी होती थीं, जैसे राजकुमारियाँ या रानियाँ। कुछ को युद्ध में बंदी बनाया गया था, जबकि कुछ को उपहार के रूप में उन्हें सौंपा गया था।
चंगेज़ ख़ान की प्रमुख पत्नियों में तातार समुदाय की दो बहनें — येसुगेन और येसुई — सबसे अधिक प्रभावशाली मानी जाती हैं। इन दोनों का उनके जीवन में विशेष स्थान था। कहा जाता है कि जब चंगेज़ ख़ान तंगुत साम्राज्य के खिलाफ अपने अंतिम सैन्य अभियान पर निकले थे, तब वे येसुई को भी अपने साथ लेकर गए थे।
चंगेज खान की मृत्यु के समय उनकी उम्र कितनी थी?
चंगेज़ ख़ान की मृत्यु के समय उनकी उम्र लगभग 65 से 72 वर्ष के बीच मानी जाती है। उनका निधन अगस्त 1227 ई. में हुआ था। इतिहासकारों के बीच उनके जन्म वर्ष को लेकर थोड़ा मतभेद है—कुछ के अनुसार उनका जन्म 1155 में हुआ था, जबकि कुछ 1162 मानते हैं। इसी वजह से उनकी सही उम्र का अनुमान अलग-अलग लगाया जाता है, लेकिन यह तय है कि वे 60 से 70 वर्ष की उम्र के बीच थे।
मुख्य बातें:
निधन: अगस्त 1227 ई.
उम्र: लगभग 65–72 वर्ष
मृत्यु स्थान: यिनचुआन, पश्चिमी शिया (Western Xia)
मृत्यु का कारण: शिकार के दौरान घोड़े से गिरने से लगी चोटें और उसके बाद हुई बीमारी
क्या चंगेज खान ने भारत पर हमला किया था?
चंगेज़ ख़ान 1221 ईस्वी में भारत की सीमा तक पहुँचा था। वह ख्वारिज्म के शासक जलालुद्दीन मंगबरनी का पीछा करते हुए सिंधु नदी के किनारे तक आया और वहीं उसे पराजित किया। इसके बाद चंगेज़ ख़ान ने भारत के अंदर गहराई तक हमला नहीं किया और वापस लौट गया। हालांकि, उसने अपनी सेना की कुछ छोटी टुकड़ियाँ भेजीं, जो मुल्तान तक पहुँचीं, लेकिन वे मुल्तान पर कब्ज़ा नहीं कर सकीं।
इस घटना से जुड़े मुख्य तथ्य आसान शब्दों में:
भारत तक पहुँचने की स्थिति:
1221 में चंगेज़ ख़ान जलालुद्दीन मंगबरनी का पीछा करते हुए सिंधु नदी के तट तक पहुँचा था। यहाँ दोनों सेनाओं के बीच युद्ध हुआ, जिसमें जलालुद्दीन हार गया।
वापस लौटने के कारण:
चंगेज़ ख़ान ने भारत के भीतर आगे बढ़ने का फैसला नहीं किया। इसका सबसे बड़ा कारण भारत की तेज़ गर्मी मानी जाती है, जिसके लिए मंगोल सैनिक तैयार नहीं थे। कुछ इतिहासकार यह भी मानते हैं कि चंगेज़ ख़ान ने किसी संकेत या सपने के कारण लौटने का निर्णय लिया।
इल्तुतमिश की भूमिका:
उस समय दिल्ली सल्तनत पर इल्तुतमिश का शासन था। उन्होंने जलालुद्दीन मंगबरनी को शरण देने से इनकार कर दिया था। इससे चंगेज़ ख़ान को भारत पर सीधा हमला करने का कोई ठोस कारण नहीं मिला।
बाद के मंगोल हमले:
चंगेज़ ख़ान के जीवनकाल में भारत पर कोई बड़ा सीधा आक्रमण नहीं हुआ, लेकिन बाद के वर्षों में मंगोलों ने कई बार भारत पर आक्रमण किए।
चंगेज खान के कितने बच्चे थे?
चंगेज़ ख़ान के कई बच्चे थे। उनके चार बेटे सबसे ज़्यादा प्रसिद्ध माने जाते हैं, क्योंकि आगे चलकर वही मंगोल साम्राज्य के उत्तराधिकारी बने। इनके अलावा उनकी कई बेटियाँ भी थीं, लेकिन मंगोल इतिहास में बेटियों का ज़िक्र कम मिलता है, इसलिए उनके नाम और संख्या पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।
चंगेज़ ख़ान के चार प्रमुख बेटे:
जोची (Jochi):
जोची चंगेज़ ख़ान के सबसे बड़े बेटे थे। उन्होंने आगे चलकर गोल्डन होर्ड नामक साम्राज्य की नींव रखी।
चगताई (Chagatai):
चगताई दूसरे बेटे थे। उनके नाम पर चगताई खानत की स्थापना हुई, जो मध्य एशिया में एक शक्तिशाली राज्य बना।
ओगेदेई (Ögedei):
ओगेदेई चंगेज़ ख़ान के तीसरे बेटे थे। पिता की मृत्यु के बाद वे मंगोल साम्राज्य के दूसरे ग्रेट खान बने।
तोलुई (Tolui):
तोलुई चंगेज़ ख़ान के सबसे छोटे बेटे थे। उनके वंश से आगे चलकर कुबलाई ख़ान और हुलेगु ख़ान जैसे प्रसिद्ध शासक पैदा हुए।
इन चारों के अलावा, चंगेज़ ख़ान की कई पत्नियाँ थीं और उनसे अन्य बच्चे भी हुए, लेकिन उनके बारे में इतिहास में बहुत कम जानकारी मिलती है।
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