हिमाचल प्रदेश की प्रमुख झीलें
हिमाचल प्रदेश में अनेक प्रकार की झीलें पाई जाती है हिमाचल प्रदेश की प्रमुख झीलों को दो भागो में बाँटा गया है कृत्रिम झील और प्राकृतिक झील।
प्राकृतिक झीलें:- वे झीलें होती हैं जिनका निर्माण मानव की सहायता के बिना प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा होता है
कृत्रिम झीलें:- का निर्माण मानवों की सहायता से होता है
हिमाचल प्रदेश की झीलें:-
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बनावटी (कृत्रिम झीलें)
गोविंद सागर झील
गोविन्द सागर हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है। यह झील बिलासपुर जिले में सतलुज नदी पर बनी है। इस झोल की लंबाई 88 किमी. है। इस झील का क्षेत्रफल 169 वर्ग किमी. है। इस पर 226 मीटर ऊंचा भाखड़ा बाँध बनाया गया है जो 1963 में बनकर तैयार हुआ।
पौंग झील
यह झील काँगड़ा जिले में है। यह झील व्यास नदी पर बनी हुई है। इसकी लंबाई 42 किमी. है। इस झील के पास पोंग बाँध भी है जो 1960 में बना था। यह झील महाराणा प्रताप सागर के नाम से जानी जाती है। 1983 में इसे अभयारण्य घोषित किया गया है। वर्ष 1994 में राष्ट्रीय स्तर की तरभूमि और 2002 में इसे रामसर साइट घोषित कर दिया गया।
पण्डोड झील
यह झेल मण्डी जिले में व्यास नदी पर बनी हुई है। इसको लंबाई 14 किमी. है और वह राष्ट्रीय राजमार्ग-21 के किनारें है। म व्यास लिंक द्वारा सुंदरनगर की बल्ह घाटी को सिंचाई सुविधा दी जाती है।
चमेरा झील
चम्बा जिले में चम्बा-पठानकोट मार्ग पर रावी नदी पर चमेरा झील का निर्माण किया गया है। इस पर 540 MW की चमेरा जन विद्युत परियोजना स्थित है।
हि.प्र. की प्राकृतिक झीलें
चम्बा जिला की झीलें
मणिमहेश झील
भरमौर उपमण्डल में स्थित मणिमहेश झील 4200 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ रक्षाबंधन को छोटा स्नान तथा राध अष्टमी को बड़ा स्नान (नौण) होता है। यहाँ गौरी कुण्ड (महिला स्नान) और शिवकुण्ड (पुरुष स्नान) हैं। यहाँ से 7 किमी. दूर धनछो है। जहाँ शिव ने भस्मासुर से बचने के लिए शरण ली थी।
गढ़ासक झील
1 किमी परिधि ऊंचाई-3505 मी. (चुराह तहसील में देवी कोठी के पास स्थित है)
खजियार
0.5 किमी. लंबी, ऊँचाई 1951 मी. । खजियार को हिमाचल प्रदेश का स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है। इसे यह नाम पी. ब्लेजर ने 7 जुलाई, 1992 को दिया। वह विश्व वाँ स्थान है, जिसे मिनी स्विट्ज़रलैंड का दर्जा दिया गया है। यह स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न से 6194 किमी. दूर है। यहाँ खज्जी नाग का मंदिर स्थित है।
लामा झील
ऊँचाई 3962 मी. है। यह सात झीलों का समूह है। (भरमौर उपमण्डल में स्थित है।)
महाकाली झील
3657 मोटा, देवी काली को समर्पित) (चुर तहसील के खुण्डी में चांजू पंचायत में स्थित है।)
इसके अलावा चम्बा जिले में चन्द्रकूप, बैसाखी, चामुण्डा, मैहल नाग डल झील स्थित हैं।
काँगड़ा जिला की झीलें
डल झील
ऊँचाई 1775 मीटर, धर्मशाला से 11 किमी. दूर है। यहाँ भागसू नाथ का मंदिर है।
करेरी झील
ऊँचाई 3048 मीटर।
मछियाल झील
यह झील नगरोटा बांगवा के जौगल खड्ड के पास स्थित है। इस झील के साथ मछिन्द्र महादेव एवं संतोषी माँ का मंदिर स्थित है। यह मछिन्द्र नाथ की तपोस्थली रही है।
मण्डी जिला की झीलें
कुमारवाह झील
ऊँचाई 3150 मीटर
पराशर झील
2743 इसमें भी चन्द्राकार गोलाकार टापू तैरता दिखाई देता है। यहाँ पर पगोडा शैली का ऋषि पराशर का मंदिर जिसे बाणसेन ने बनवाया था। ऋषि पराशर वेद व्यास के पिता थे।
रिवालसर झील
इस झील को बौद्ध लोग पद्माचन भी कहते हैं। बौद्ध भिक्षु पद्मसम्भव के जन्म दिन पर यहाँ छेच्शु मेला लगता है। यह झील हिंदू, सिख व बौद्ध तीनों धर्म के लोगों का तीर्थ स्थान है। इसे तैरते हुए टापुओं की झील भी कहते हैं। यह लोमष ऋषि की तपोस्थली रही है।
कामरूनाग यह झील
3150 मीटर की ऊँचाई पर चिच्योट तहसील में स्थित है। इस झील के पूर्व में ऊँचाई पर शिकारी देवी का मंदिर स्थित है।
कुतभयोग झील
यह झील 1700 मीटर की ऊँचाई पर रिवालसर से 4 किमी. की दूरी पर प्रमुख नैना देवीधार पर स्थित है। इस झील का संबंध पाण्डवों की माता कुंती से है।
कालासर झील
यह झील रिवालसर झील के किनारे बसे शहर के शिखर पर 1755 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
●सुखसार झील ●लीलासर झील ● डवारू सर झील ●खवलासर झील।
कुल्लू जिला की झीलें
मनतलाई झील
4116 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस झील से पार्वती नदी निकलती है।
दयोरी झील (सैंज घाटी में स्थित)
हंसा झील- (सैंज घाटी में स्थित)
भृगु झील – यह भृगु ऋषि की तपोस्थली थी।
मुंग त्युंग झील – यह मूंग ऋषि की तपोस्थली थी।
दशहर झील
4200 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह झील मनाली से 25 किमी. दूर स्थित है। यहाँ पर स्नान करने से अकबर की बेटी का अधरंग ठीक हुआ था।
नैनसर झील
बाहरी सिराज में भीमद्वार और श्रीखण्ड महादेव के बीच 4000 मीटर की ऊँचाई पर यह झील स्थित है। यहाँ भीम ने तैयार की थी। श्रीखण्ड महादेव की यात्रा के दौरान तीर्थयात्री इसमें स्नान करते हैं।
सरयोलसर झील
3100 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह झील जालोरी दर्रे के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। इस झील की देवी बूढ़ी नागिन है जिसका मंदिर घियागी में है। आभी नाम की नन्ही सी चिड़िया इसके जल की सफाई करती है। यह बंजार उपमण्डल में स्थित है।
डैहनासर झील- 15000 फुट की ऊँचाई पर स्थित इस झील के पास भगवान शिव ने त्रिशूल से डायन का वध किया था।
हंसा झील – (बंजार उपमण्डल में)
सरीताल झील
लाहौल-स्पीति जिला की झीलें
चन्द्रताल झील
ह्यूनत्सांग ने इसे लोहित्य सरोवर का नाम दिया था। यह झील 4270 मीटर की ऊँचाई पर स्पीति में स्थित है। इस झील से चन्द्रा नदी का उद्गम होता है। यह झील रामसर साइट है।
सूरजताल झील
4883 मीटर ऊँचाई पर स्थित इस झील से भागा नदी का उद्गम होता है। यह झील बारालाचा दर्रे के समीप स्थित है।
दीपकताल झील
दारचा और बारालाचा के मध्य 3200 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस झील को सूरजताल झील का छोटा भाई माना जाता है।
यूनामसा झील
लाहौल में स्थित यह झील 4680 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
नीलकण्ठ -लाहौल के नैनगाहर घाटी में स्थित इस झील में केवल पुरुषों को दर्शन करने की आज्ञा है। यह झील नोले रंग की है इसलिए इसे नीलकण्ठ कहा जाता है।
धनकर झील-यह झील स्पीति में स्थित है।
सिस्सू झील
शिमला जिला की झीलें
• चन्द्रनाहान झील-ऊँचाई 4267 मी. (रोहडू, शिमला में स्थित) पब्बर नदी का उद्गम स्थल। यह झील 7 सरोवरों का समूह है।
• तानु जुब्बल झील (नारकण्डा के समीप)
• गढ़ कुफर
• कराली झील
• यरावोनसर झील
किन्नौर जिला की झीलें
• नाको झील ऊंचाई 3662 मी.
• सोरंग झील।
सिरमौर जिला की झीलें
रेणुका झील
यह हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी प्रकृतिक झील है, जो 25 किमी लंबी है। इसकी आकृति सोई हुई स्त्री जैसी है। का भगवान परशुराम (विष्णु के छठे अवतार) की माता है। रेणुका को अपने पुत्र परशुराम के हाथों बलिदान होना पड़ा, जिसने अपने पिता जमदग्नि की आज्ञा का पालन करते हुए ऐसा किया। जमदग्नि जामलू देवता के रूप में भी जाने जाते हैं। यह झील रामसर आर्द्रभूमि साइट है।
• सुकेती झील (मारकण्डा नदी के बाएं किनारे)